तेज खबर 24 दिल्ली।
देश मे आवारा कुत्तों पर की गयी सख्ती के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट ने मंगलवार को अपना आखिरी फैसला सुनाते हुए पुराने फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तो से ज्यादा लोगों के जान की हिफाजत को अहमियत दिया है।
दरअसल आवारा कुत्तों के खतरे से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त फैसला सुनाते हुए अस्पतालों, स्कूलों और रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने पूर्व आदेश (7 नवंबर 2025) को बरकरार रखा है। कोर्ट ने ‘डॉग लवर्स’ और एनजीओ की उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जो इस आदेश में बदलाव की मांग कर रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक संस्थानों और शैक्षणिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
कोर्ट ने जारी आदेश मे यह भी कहा की एक बार जब कुत्तों को नसबंदी (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) के लिए सार्वजनिक स्थानों से हटा दिया जाता है, तो उन्हें वापस उन्हीं क्षेत्रों में नहीं छोड़ा जा सकता।कोर्ट ने कहा कि “गरिमा के साथ जीने के अधिकार” में आवारा कुत्तों के हमलों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने यह भी कहा कि डॉग बाइट के मामलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि गंभीर रूप से बीमार, पागल या अत्यधिक खतरनाक कुत्तों को कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए निपटाया जा सकता है।इसके आलावा कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों या गंभीर चोटों के मामले में राज्य सरकारों की जवाबदेही भी तय की गई है, और पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

