तेज खबर 24 रीवा।
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। प्रदेश सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रीवा और नवगठित मऊगंज जिला सहित प्रदेश के कुल 18 अस्पतालों के संचालन को निजी हाथों (आउटसोर्स) में सौंपने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार के इस कदम के बाद से ही क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण को लेकर बहस छिड़ गई है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत 5 साल का समझौता
मिली जानकारी के अनुसार, सरकार इस योजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू कर रही है। इसके तहत रीवा और मऊगंज के इन अस्पतालों का संचालन आगामी 5 वर्षों के लिए निजी एजेंसियों को सौंपा जाएगा।
कैसी होगी नई व्यवस्था?
बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर: अस्पतालों की जमीन और इमारत पर सरकार का ही मालिकाना हक रहेगा।
दवाइयां और उपकरण: मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां और बुनियादी चिकित्सा उपकरण सरकार द्वारा ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्टाफ और डॉक्टर्स: विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की तैनाती पूरी तरह से निजी एजेंसी के जिम्मे होगी।
सूची में 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भी शामिल
सरकार ने जिन 18 अस्पतालों को इस योजना के दायरे में लिया है, उनमें रीवा और मऊगंज जिले के 8 प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन अस्पतालों में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी चल रही थी।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों (जैसे स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और सर्जन) की भारी कमी है। सरकारी भर्तियों के बावजूद डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने से कतराते हैं। सरकार का मानना है कि निजी एजेंसियों के माध्यम से इन अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी को दूर किया जा सकेगा और स्थानीय लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
शुरू हुआ विरोध, उठ रहे हैं कई सवाल
सरकार के इस फैसले का स्वास्थ्य संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यह स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्ण निजीकरण की शुरुआत है।
सवाल है की… क्या निजी हाथों में जाने के बाद गरीबों को मिलने वाला मुफ्त इलाज बंद हो जाएगा?
क्या जांच और अन्य सुविधाओं के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जाएगी?
अस्पतालों में पहले से कार्यरत सरकारी कर्मचारियों और संविदा स्टाफ का भविष्य क्या होगा?
विपक्ष और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे आम जनता की जेब पर डाका डालने जैसा कदम बताया है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध के बीच इस योजना को धरातल पर कैसे लागू करती है।
उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा, सरकार के हाथ में रहेगी अस्पतालों की कमान
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने रीवा और मऊगंज जिलों के अस्पतालों को आउटसोर्स (पीपीपी मोड) पर दिए जाने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से आम जनता और गरीबों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की खबरों के बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि यह अस्पतालों का पूर्ण निजीकरण नहीं बल्कि केवल व्यवस्था सुधारने के लिए आउटसोर्सिंग प्रबंधन है। उन्होंने विंध्य की जनता को भरोसा दिलाया है कि अस्पतालों में पहले की तरह ही मुफ्त दवाइयां, टीके और इलाज की सुविधाएं मिलती रहेंगी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना है ताकि स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकें। अस्पताल की निगरानी पूरी तरह सरकारी तंत्र के पास ही रहेगी।
मुफ्त इलाज जारी रहेगा
डिप्टी सीएम ने साफ किया है कि अस्पतालों का प्रबंधन निजी हाथों में जाने के बाद भी मरीज का इलाज पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत ही होगा। मरीजों को मिलने वाली दवाइयां, टीके और बुनियादी जांचें पूरी तरह मुफ्त रहेंगी क्योंकि ये सब सरकार उपलब्ध कराएगी।
केवल मैनेजमेंट और स्टाफ होगा आउटसोर्स
बताया गया की सरकार अस्पताल की इमारतों को नहीं बेच रही है。 निजी एजेंसियों को सिर्फ इसलिए जिम्मेदारी दी जा रही है ताकि वे अस्पतालों में खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा कर सकें। डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन का प्रबंधन निजी एजेंसी करेगी।
निगरानी सरकार के हाथ में होगी
अस्पतालों के संचालन पर पूरी तरह से स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण और निगरानी बनी रहेगी। यदि निजी एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है या मरीजों को परेशानी होती है, तो सरकार उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुधार का लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों (जैसे रीवा और मऊगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। इस पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीणों को इलाज के लिए जिला अस्पताल या बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े।
Tezkhabar24.com Sach wahi jo ham dikhaye…