दर्द और संघर्ष में बीत रहा 3 बच्चों का बचपन, इलाज के लिये परिवार को शासन प्रशासन से मदद की दरकार…
तेज खबर 24 रीवा।
मध्यप्रदेश में रीवा जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले परिवार के बच्चों की शक्ल हू बहू अंग्रेजों की तरह है।
यह बच्चें अंग्रेजों की तरह अंग्रेजी तो नहीं बोल पाते लेकिन दिखने में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ देते है।
इन बच्चों के सफेद बाल और सफेद चेहरा देखकर कोई भी इन्हें अंग्रेज समझ लेगा।
दरअसल बच्चों का अंग्रेजों की तरह दिखना कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि एक अनुवांशिक बीमारी बताई जा है। वैसे तो हर मां बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे हंसते खेलते बड़े हो। बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और खूब तरक्की करे, लेेकिन रीवा के जवां जनपद क्षेत्र में स्थित देवखर गांव में रहने वाले परिवार के बच्चों का बचपन दर्द और संघर्ष के साथ गरीबी का दंश झेल रहा है।
बताया जाता है कि इस परिवार में तीन बच्चे है जिनमें 9 साल, 6 साल की दो बच्चियां है और 5 साल का छोटा बेटा शामिल है। इन बच्चों का पूरा शरीर सफेद है, धूप पड़ते ही आंखों में अंधेरा छा जाता है और शरीर में ऐसी खुजली होती है कि खून तक निकल आता है। बताते है कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है जिसे मेडिकल साइंस की भाषा में एल्बिनिज्म बोलेते है। इस बीमारी के कारण शरीर और बालों का सफेद होना पाया जाता है।
बताते है कि बीमारी से ग्रसित बच्चों को जब खुजली होती है तो ये दर्द से तड़प उठते है, शरीर पर चकत्ते पड़ जाते है और त्वचा छिलने लगती है। इसके साथ ही उम्र के साथ-साथ उनकी शारीरिक ताकत भी कम होती जाती है।
हालाकि बच्चों के माता पिता पूरी तरह से सामाँन्य है, लेकिन उनके तीनों बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हो गए है। बच्चों के पिता सुनील कोरी की मांने तो उनकी जानकारी में परिवार के किसी भी सदस्य को यह बीमारी नहीं थी, ऐसे में उनके तीनों बच्चे कैसे इस बीमारी से ग्रसित हो गए यह जानकर वह खुद हैरान और परेशान है।
बताया जाता है कि जब गांव के बच्चे खुले मैदान में खेलते है तो वही यह बच्चे तेज धूप से बचने घर के कोेनें में सिमट जाते है। इन बच्चों की मुस्कान तो मासूम है लेकिन उनकी आंखों में दर्द साफ दिखाई देता है। वहीं गरीबी इस परिवार की सबसे बड़ी मजबूरी है, जिसके चलते वह बच्चों का इलाज तक नहीं करा पा रहे है।
बच्चों के पिता सुनील कोरी मजदूरी कर जैसे तैसे परिवार चलाते है, जबकि मां माया देवी बच्चों की हालत देखकर हर दिन टूटती जा रही है और इलाज के लिये बड़े अस्पताल तक पहुंचना उनके लिये किसी सपने जैसा है। फिलहाल स्थानीय समाजसेवियों नें सरकार से इस परिवार के लिये मदद की अपील की है ताकि बच्चों का समुचित उपचार हो सके।
Tezkhabar24.com Sach wahi jo ham dikhaye…