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धरती के भगवान ने बचाई जान : रीवा की सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टर्स ने दो मरीजों को हार्ट ब्लॉक से दिलाई निजात…

एक सप्ताह में दो डबल चेंबर पेसमेटर लगाकर मरीजों को हार्ट ब्लॉक से दिलाई निजात…
तेज खबर 24 रीवा।
धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर ने मरीजों की जान बचाकर यह सिद्ध कर दिया है कि वह धरती के भगवान यूं ही नहीं कहे जाते। रीवा में हार्ट ब्लॉक की समस्या से जूझ दो ऐसे मरीजों की जान बचाई गई जिनके दिल की धड़कन कभी भी रुक सकती थी। डॉक्टर की टीम ने ऐसे मरीजों में दो डबल चेंबर पेसमेकर लगाकर ना सिर्फ जान बचा ली बल्कि उन्हें नया जीवन दे दिया।
दरअसल यह करिश्मा रीवा की सुपर स्पेशलिटी अस्तपाल के ह्रदय रोग विभाग के डॉक्टरों ने कर दिखाया है।
दरअसल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक सप्ताह में दो डबल चेंबर पेसमेकर लगाकर एसोसिएट प्रोफेसर , कार्डियोलॉजी डॉ. एस ण्के. त्रिपाठी ने दो अलग अलग मरीजों को हार्ट ब्लॉक से निजाद दिलाई। दोनो मरीज रीवा के रहने वाले हैं और दोनों को ही हार्ट ब्लॉक के कारण दिमाग में खून का बहाव बाधित होता थाए जिसके चक्कर बेहोशी जैसे हालात बनते थे । अचानक दिल की धड़कन रुकने से उन्हें मृत्यु का भी खतरा था। डबल चेंबर पेसमेकर लगने से अब उनकी दिल की धड़कन कभी कम नहीं होगी और मृत्यु का खतरा भी पूर्ण रूप से टल गया है ।

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि डबल चेंबर पेसमेकर दिल की प्राकृतिक धड़कन की तरह ही धड़कता है जबकि सिंगल चेंबर पेसमेकर में मशीन सिर्फ हार्ट के एक चेंबर में धड़कन पैदा करता है जोकि नेचुरल पेसमेकर से भिन्न है । इसी वजह से सिंगल चेंबर पेसमेकर लाइफसेविंग तो है पर लंबे समय तक इसके पेसिंग से हृदय की पंपिंग क्षमता कम होने का खतरा बना रहता है । ऐसे जटिल प्रोसीजर के लिए मरिज पहले सिर्फ महानगरों के बड़े हृदय रोग संस्थान पर आश्रित रहते थे पर अब उन्हें किसी भी बाहर के सेंटर में जाने की कतई जरुरत नही है । अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान समय में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवाए प्रदेश में संचालित किसी भी बड़े इंस्टीट्यूट से बेहतर काम कर रहा है एवं कार्डियक प्रोसीजर की विविधता और संख्या में चिकित्सालय प्रदेश में अग्रणी है । यह सब संभव हो रहा है रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सकों के प्रयास से। इस जटिल प्रक्रिया को करने में कैथ लैब टेक्नीशियन जयनारायण मिश्रा, मनीष, सुमन, सत्यम, नर्सिंग स्टाफ, पेसमेकर टेक्निकल सपोर्ट पर्सन पंकज त्रिपाठी की अहम भूमिका रही।

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