मागुर प्रजाति की मछली के सेवन से कैंसर का खतरा, प्रतिबंध के बावजूद की जा रही थी बिक्री…
तेज खबर 24 रीवा।
रीवा में प्रतिबंध के बावजूद मागुर मछली की बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा था। कैंसर जैसी भयावह बीमारी का खतरा पैदा करने वाली इस मागुर मछली की बड़ी खेप खपाने की तैयारी चल रही थी, तभी पुलिस और प्रशासन की टीम नें छापेमार कार्यवाही की है। पुलिस और प्रशासन की टीम नें तकरीबन 65 किलो प्रतिबंधित मछली जप्त कर उसका मौका पर ही विनष्टीकरण कराया है।
दरअसल जिले में मछली मारने पर प्रतिबंध की अधिसूचना का पालन कराने और अवैध रूप से मछली मारने, उसके विक्रय व परिवहन की रोकथाम के लिए मत्स्योद्योग विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में गुढ़ क्षेत्र में मत्स्योद्योग विभाग की टीम ने महेन्द्र जायसवाल उर्फ रिंकू पिता मोतीलाल जायसवाल उम्र 42 वर्ष के यहाँ कार्रवाई करते हुए 65 किलोग्राम प्रतिबंधित नस्ल की थाई मागुर मछली जब्त की।
फिलहाल जब्त की गई मछली को तेलियाडाह तलैया स्टेडियम के पास जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर विनिष्टीकरण करा दिया गया। कार्रवाई के दौरान मत्स्य निरीक्षक अपर्ण मिश्रा, अन्नपूर्णा मिश्रा तथा एएफओ कमल प्रताप उपस्थित रहे।
इस संबंध में मत्स्योद्योग विभाग के सहायक संचालक कमल नार्वे ने बताया कि थाना प्रभारी गुढ़ को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि उक्त व्यक्ति के पास प्रतिबंधित मागुर मछली रखी हुई है। सूचना मिलते ही टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और 65 किलोग्राम प्रतिबंधित मछली जब्त की।
साल 2000 से इस मछली पर है प्रतिबंध…
सहायक संचालक ने बताया कि भारत सरकार और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने वर्ष 2000 से ही थाई
मागुर मछली के पालनए विक्रय और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है।
मछली के सेवन से कैंसर का खतरा
जानकारों की मानें तो इस मछली में लेड शीशा और आयरन जैसी भारी धातुएं अत्यधिक मात्रा में पाई जाती हैं, जिसके सेवन से इंसानों में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। यह अत्यधिक हिंसक और मांसाहारी प्रजाति की मछली है। यदि इसे किसी तालाब में छोड़ दिया जाए, तो यह स्थानीय प्रजातियों की सभी मछलियों को खाकर पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर देती है।
Tezkhabar24.com Sach wahi jo ham dikhaye…